काग़ज़ी रिश्ता, सच्चा प्यार
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वह एक अमीर परिवार की वारिस थी, लेकिन हालातों ने उसे मुश्किल में डाल दिया। उसी दौरान एक प्रभावशाली परिवार का उत्तराधिकारी, जिसने पारिवारिक दबाव के कारण शादी का ऐलान किया था, उसे अपने भाई की सगाई में अपनी होने वाली पत्नी के रूप में पेश करता है।असल में, यह सब सिर्फ़ एक सौदा था। उसने उसे केवल दिखावे के लिए रखा, ताकि वह परिवार के दबाव और ज़िम्मेदारियों को संभाल सके। दोनों के बीच एक अनुबंध तय हुआ, जो समय-समय पर बदला जाता रहा।साथ रहते-रहते, दिन-ब-दिन उनके बीच भावनाएँ गहराती चली गईं। अनजाने में, यह दिखावटी रिश्ता सच्चे एहसासों में बदल गया।जब अनुबंध की स्याही सूख चुकी थी, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे अब सिर्फ़ साथी नहीं रहे — बल्कि सच्चे दिल से एक-दूसरे से प्यार करने लगे थे।